Friday, 7 February 2014

उन्स

कौन कहता है जिन्दगी से उन्स न रहा 

कौन कहता है जमाने से प्यार न रहा


संगो खिस्त की दीवारों से निकलकर 


कौन कहता है मेरा घर बार न रहा 


एक बार मुडके देखने में क्या जाता है तेरा


जाते जाते भी हमको करार न रहा


अब शिकायतों का मौका बचा भी नही कोई


वो बैरी न रहा वो यार न रहा..............!!!!!!!

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