Friday, 7 March 2014

महिला दिवस विशेष

है क्रोध हमारा ज्वाला तो प्यार हमारा मोती है
हर नारी अग्नि सी पावन, हर दीपक की ज्योति है
कुछ ख़ास है हम में ऐसा जो और कहीं ना हो सकता है
कुछ बात हमारी ऐसी है जो केवल हम में होती है...........!!

कुछ राज हमारी फितरत के, गर जान अगर ले ये दुनिया
हो जाये चमन हर उजड़ा वन, देखे फिर जन्नत क्या होती है
कुछ चाल हमारी ऐसी जो वक़्त बदल दे आज अभी
हर बार सृजन नव करती है जब,तो खुद को जैसे खोती है

कुछ गीत हमारे ऐसे जो...गान हुए, आजान हुए
कुछ आंसू की बूंदे ऐसी जो हर मन के कलुष को धोती है
कुछ शब्द हमारे ऐसे कि जिनके आशय अनसुलझे
कुछ कृत्य अनूठे जिनसे हम आगे, दुनिया पीछे होती है

कभी कभी खनखनाती हंसी, जो हर कलरव बन जाती है
वही जगाती नींद से उनको, जिनमे मानवता सोती है
कुछ हिस्सेदारी ही हमारी, क्यों सबका रुतबा बन जाती है
कुछ आँखों की भाषा ही अपनी, सारी मधुशाला होती है 

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