Sunday, 6 April 2014

मिसालेदोस्ती

करता है तारीफ अब भी, जहां अपने साथ का

बरसो से है, बरसो रहेगा, गुणगान अपने साथ का

हम मिसालेदोस्ती की गिरफ्त में हैं आजतक 

लोग करते आज भी हैं, किस्सा बयान अपने साथ का

चर्चे बहुत से हुए हैं, दोस्ती के का जहां में पर

मकसद रहा है हाँ बहुत महान अपने साथ का

एक मैं और एक तुम हैं, जान अपने साथ की

'ख़ुशी' को भी हो रहा है, भान अपने साथ का.....!! 

इंसानियत

इंसानियत हर रोज ही यहाँ छली जाती है
ये दुनिया है कि दुनिया के हर कूचे से, 
रोज चाँद जज्बातो की बलि जाती है...........

वो बात अलग है, वो और लोग हैं...
जिनके घर तक एहतरामो की गली जाती है......!!

जुल्मोसितम और दर्द का निकाह है देखो
एहसानों की, तानों की हल्दी माली जाती है....!!

उसके पड़ोस में आजकल कोई जख्मी है शायद
हर रोज उस तरफ नमक की डली जाती है..........!!

कल कहीं किसी का जश्न था, जलसा था
आज उसके यारों की टोली, जली जाती है.....!!

खूबसूरत गुलाब है तो, बदसूरती क्या है
जान से तो खिलती हुई कली जाती है.....!!

सुना है ख़ुशी आई है फिर गलती से इस गली 
आँख खुलते ही मगर हर 'ख़ुशी' चली जाती है.......!! 

गहमागहमी

रूत बदली, रुतबा बदला तो लोग ये सारे बदल गये
कुछ नाजुक कलियाँ बनी संगदिल, कुछ पत्थर भी पिघल गये

वही मोड़ है, वही रास्ता, वही पुराने रहवर भी......
लेकिन सफरेवजह औ मायनेमंजिल बदल गये 

बहुत हुआ चर्चा ऐ मसला, लम्बी लम्बी बात चली 
खुशफहमी में बीता किस्सा, किश्तो में किस्से निकल गये

प्यार, मोहब्बत, फ़िक्रोजिकर के सारे आलम डूब गये, 
रंजोगम कि लौ में शायद सारे जज्बे उबल गये 

सारे ख्वाब थे बावस्ता बस एक समुन्दर ऐ मंजर से
कुछ फिसले, कुछ डूबे, लेकिन कुछ बेचारे सम्हाल गये

चहक चहक क्र मन क पंछी कर तो चुके हैं काफी ज़िद
थोडा दान पानी डाला तो खुदबखुद सब बहल गये

यु तो खुदगर्जी, खुद्दारी के बहुतोबहुत से दौर चले 
क्या कारण, क्या वजह बनी कि लोग ये सारे उछल गये

साड़ी ज़द्दोजहद में सबके हाथ बहुत कुछ आया तो
यु ही सारी गहमागहमी में 'ख़ुशी' के लम्हे फिसल गये......!!