Thursday, 26 February 2015

वहम

न तोड़ गुलाबी जंजीरें..
जीने का सबब उन यादों की..
हम सब्र रखेंगे कायम  बस..
वो सच न हो तो हो वहम सही...
बात न कर, फ़रियाद न सुन
न कोई तमन्ना पूरी कर...
कोई खबर न ले, एहसान न कर..
तू कर दे इतना रहम सही...!!
कल भी तूफ़ान आया था...
मुझ पर आजमाने वजूद तेरा...
कहा हो जैसे खौफ के मद्दे
तू थोड़ा सा तो सहम सही....!!!
बेवफा हुए, बेकदर हुए
और हुए कभी बेपरवाह भी....
अपनी तानाशाही पर दुनिया हमको
बेरहम कहे, बेरहम सही...!!!
कहता रहा ज़माना मुझको...
वहम है उसका प्यार मगर....
मेरी 'ख़ुशी ' से बावस्ता...
वो वहम अगर है, वहम सही...!!

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