Friday, 18 September 2015

'हृदयहीनता'

निपट सरल भी और अविरल भी,
निर्भेद्य भी हैं, निर्बाध भी फिर भी
निराधार नियत नियमों के चलते...
किंचित वे निष्ठुर बनकर रहते हैं.........
निश्चितता पर भी निश्चिंत नहीं..
निर्भीक नहीं..निष्फिक्र नहीं
ये कैसी निर्ममता है जिसके नाते
निष्ठा को भी निरर्थक कहते हैं..
निराकार निपट कुछ भाव निरंकुश...
निर्दोष नही रह जाते उस क्षण
नीर भरे दो नयन निरीह जब....
निश्छलता का फल सहते हैं..
निर्माण भी हैं...निर्याणक भी हैं
और निर्माण के निर्णायक फिर भी
अपनी निष्ठुरता को न जाने क्यूँ,
'हृदयहीनता' कहते हैं.....

सिरफिरा


अमूमन लोग जीते हैं 
बड़ी तरकीब से जिंदगानी...
वो बेतरतीब है, तो मेरी
 मानिंद ही सिरफिरा होगा...


सबेरे किश्तीगीर सारे
 चुन लाये समुन्दर से मोती...
मेरी ही आँख से कल रात
 आंसू कोई गिरा होगा...

शहर में चर्चे बहुत हैं..
किसी को गहरी शिकायत है..
गिला क्या, बेशक वो
 पुराना दोस्त मिरा होगा.....

ऐ बदनसीबी तेरा शैतान है मालिक,
 तो मेरा भी ख़ुदा है..
फिर फ़िज़ा के हाथो 
खिज़ा का मजा किरकिरा होगा....