Sunday, 6 April 2014

इंसानियत

इंसानियत हर रोज ही यहाँ छली जाती है
ये दुनिया है कि दुनिया के हर कूचे से, 
रोज चाँद जज्बातो की बलि जाती है...........

वो बात अलग है, वो और लोग हैं...
जिनके घर तक एहतरामो की गली जाती है......!!

जुल्मोसितम और दर्द का निकाह है देखो
एहसानों की, तानों की हल्दी माली जाती है....!!

उसके पड़ोस में आजकल कोई जख्मी है शायद
हर रोज उस तरफ नमक की डली जाती है..........!!

कल कहीं किसी का जश्न था, जलसा था
आज उसके यारों की टोली, जली जाती है.....!!

खूबसूरत गुलाब है तो, बदसूरती क्या है
जान से तो खिलती हुई कली जाती है.....!!

सुना है ख़ुशी आई है फिर गलती से इस गली 
आँख खुलते ही मगर हर 'ख़ुशी' चली जाती है.......!! 

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