Sunday, 30 March 2014

जलते शोले

सर्द फ़िज़ाएं हर शाम सहर अब
बर्फ हवा में जैसे घोलें.......

कभी कभी मिलती है फुर्सत
कुछ मैं बोलूं, कुछ तू बोले......

मन में टीस सी उठती है की 
जुबाँ कहीं ये राज न खोले 

न जाने कब जुल्फ के बादल 
कचनारों के अंक में सोले

दिल कहता है मौका मिलते ही
मन के कलुष को प्रेम से धोले 

बहुत देर हुई चर्चा करते 
राख में दब गये जलते शोले.......!!

कायनात

लोग बदल जाते हैं, कायनात बदल जाती है....
वक़्त बदलता है तो हर बिसात बदल जाती है...

वक़्त पे साथ देने की जो बात करते हैं.....
वक़्त पड़ने पे उनकी हर बात बदल जाती है..

रंग चढ़ता है, उतरता है, नशा छाता है, खो जाता है...... 
होश आता है तो इंसान की हयात बदल जाती है......

घातों से, प्रतिघातों से, हालात के झंझावातों से.... 
खयालात बदल जाते हैं, वजहे हयात बदल जाती है...........!! 

Monday, 24 March 2014

गलतफहमियां

नदी हूँ जल से रीती हूँ...
मत पूछो क्यों जीती हूँ...

प्यास 'ख़ुशी' की जाग उठे तो
खुद के आंसू पीती हूँ....

सदियों की जो चाहत की तो
लम्हा बनकर बीती हूँ....

दिल पे ज़ख्म हजारों हैं,
जो रोज रोज मैंने सीती हूँ...

खेल तो लम्बा था न जाने
हारी हूँ या जीते हूँ...

किन उम्मीदों में न जाने
गलतफहमियों में जीती हूँ...!!

जज्बात

अंजाम दो, आगाज दो, एक नया हमराज दो
दूर गर कोई जा रहा हो, तुम उसे आवाज दो.....

प्यार दो, तकरार दो जीत भी लो, दिल हार दो
गिर रहे को थाम लो और जीने के आसार दो....

मान दो, सम्मान दो, कुछ नए अरमान दो
ज़िंदगी से दूर जो हो तुम ही उसको जान दो

आस दो, उल्लास दो, उड़ने को आकाश दो
साथ अपने चलने का, अब मुझे विश्वास दो

बात दो, जज्बात दो, थोडा मेरा साथ दो...
हो अकेला इस जहां में कोई तो फिर हाथ दो.......!!

फलसफा

मुझे अपने अक्स कि कुछ सादगी दे दो....
मैंने हंसी दे दू तुम्हे तुम बेबसी दे दो...

कुछ बात तो जरुर उस शख्स में होगी...
खुद माहताब कहता है जिस से चांदनी दे दो

ऐसे भी लोग हैं जमाने में जिनका फलसफा ये है
जिसने जब जो माँगा उसे वही दे दो...

आखरी ख्वाहिश जैसे ही ये बात मान लो
'ख़ुशी' को कुछ लम्हे और ज़िंदगी दे दो.........!!



नसीब

हर बार नसीब मुझसे रूठ जाता है.......
सुख साथ चलता है दो घड़ी, मगर फिर छूट जाता है...... 

कितना मुश्किल है सम्हलना पूछे कोई हमसे......
न चाहते हुए भी रिश्ता कोई जब टूट जाता है........

कई दफा न उतारो यु खुद को शीशे में....
अक्स बिखर जाता है जब शीशा टूट जाता है....

अब मेरी नजदीकियों की उम्मीद न करना....
ज़रा सी दूरियों से ही ये दिल टूट जाता है.......!!

Friday, 7 March 2014

महिला दिवस विशेष

है क्रोध हमारा ज्वाला तो प्यार हमारा मोती है
हर नारी अग्नि सी पावन, हर दीपक की ज्योति है
कुछ ख़ास है हम में ऐसा जो और कहीं ना हो सकता है
कुछ बात हमारी ऐसी है जो केवल हम में होती है...........!!

कुछ राज हमारी फितरत के, गर जान अगर ले ये दुनिया
हो जाये चमन हर उजड़ा वन, देखे फिर जन्नत क्या होती है
कुछ चाल हमारी ऐसी जो वक़्त बदल दे आज अभी
हर बार सृजन नव करती है जब,तो खुद को जैसे खोती है

कुछ गीत हमारे ऐसे जो...गान हुए, आजान हुए
कुछ आंसू की बूंदे ऐसी जो हर मन के कलुष को धोती है
कुछ शब्द हमारे ऐसे कि जिनके आशय अनसुलझे
कुछ कृत्य अनूठे जिनसे हम आगे, दुनिया पीछे होती है

कभी कभी खनखनाती हंसी, जो हर कलरव बन जाती है
वही जगाती नींद से उनको, जिनमे मानवता सोती है
कुछ हिस्सेदारी ही हमारी, क्यों सबका रुतबा बन जाती है
कुछ आँखों की भाषा ही अपनी, सारी मधुशाला होती है 

Monday, 3 March 2014

आज फिर चले आओ...




उठ रही है सांस सांस, क्यों सुवास कोई मनचली
गुजरे पल, फिर गुजरे दिन, फिर मास काफी गुजर गये
हुआ नही आभास ये मुझको, अनायास तुम्हारी बन चली
मुझे सतत एहसास तुम्हारा, है नहीं विश्वास तुमको
मैंने दिल की हर परत से, बना लिया कुछ ख़ास तुमको
लग नहीं रहा कहीं पे, मन बेचारा बेमन है....
आज फिर चले आओ, प्रेम का निवेदन है............!!

तुम अगर सागर विशाल, मैं नदी बनूँ, निर्झरा बनूँ
तुम अगर आकाश विस्तृत, सब सहूँ और धरा बनूँ
मैं मृदा जो बस तुम्हारे प्रेम रस में भींगी हुई
उत्सुक बहुत तुम जो कहो पूरा नहीं तो ज़रा बनूँ
मैं तुम्हारी चेतना, फिर भाव क्यों अचेतन है.....
आज फिर चले आओ, प्रेम का निवेदन है.......!!

तुम वही चट्टान हिम की, मैं जलती ज्वाला आज फिर
दे दिया हर अन्धकार को उजाला आज फिर
हर रास्ते के दो तरफ, सजाये हैं दीपक आस के
कोई दिल का बहुत प्रिय, ज्यों आने वाला आज फिर
तन तो पहले भी यही था, प्राण से अब सम्मेलन है...
आज फिर चले आओ...प्रेम का निवेदन है...........!!


भूल बैठे हो डगर कह, किसी बहाने आ जाओ
मैं निभाऊं हर कसम, तुम आजमाने आ जाओ
मैंने सारे किये जतन उस चित्रकारी को भरने के
बना दिए निर्जीव पात्र, तुम प्राण जगाने आ जाओ
लोग अब कहने लगे हैं, मुझमे तुझमे अनबन है....
आज फिर चले आओ...प्रेम का निवेदन है..........!!