Saturday, 28 February 2015

वो लड़की

सुनसान सड़क पर, तनहा सी..
बारिश में चलती वो लड़की
तीन सौ छप्पन बंदिशों में
बेबाक सी पलती वो लड़की...
भीगे उसके चेहरे पर यूँ तो
कुछ खास मुझे अंदाज नहीं...
वो पानी है या आंसू हैं...
है आँखें मलती वो लड़की....
वो सन्नाटों का खौफ है या फिर
दुनिया से उलझने का लावा...
क्या बात है ठंडी बूंदो से
बेजार उबलती वो लड़की
एक अनजाना डर सा है...
न सामने उसके पड़ जाऊं
मैं राह कोई भी चुनती हूँ
हर तौर निकलती वो लड़की..
उसके अंदर भी बेशक
अरमानों को पलते देखा है..
जब कच्ची इमली तोड़ सके..
पंजों पे उछलती वो लड़की...
कोई शौक नही, सरोकार नही
बस इतना उसको जाना है
कुछ तो ऐसा है जिस पर
है सबको खलती वो लड़की..

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